Wednesday, December 19, 2018

जीवन की सच्चाई - 1

आज हम जीवन की भागदौड़ मे खुद को भूलते जा रहे है, ओर एक दिन ऐसा आएगा की इस माया की भागदौड़ मे खुद को खत्म कर देंगे ।

मनुष्य को अपना सुखी जीवन जीने के लिए सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। जीवन में 'रात व दिन' की तरह आशा व निराशा के क्षण आते जाते रहते हैं। आशा जहां जीवन में संजीवनी शक्ति का संचार करती है वहीं निराशा मनुष्य को पतन की तरफ ले जाती है। निराश मानव जीवन में उदासीन और विरक्त होने लगता है। उसे अपने चारों तरफ अंधकार नजर आता है। निराशा का संबंध एकतरफा सोच भी है। साथ ही मनुष्य के दृष्टिकोण पर भी आधारित है, मनुष्य जिस तरह की भावनाएं रखता है वैसी ही प्रेरणाएं मिलती हैं। जो लोग स्वयं के लाभ के लिए जीवन भर व्यस्त रहते हैं उन्हें जीवन में निराशा, अवसाद, असंतोष ही परिणाम में मिलता है।



जीवन के इसी व्यस्त रास्ते मे हमे कही से आशा की किरण दिख जाती हे ओर हमे एक "जीने की राह" मिल जाती है ।


अधिक जानकारी के लिए आप हमारी वैबसाइट पर जाये
www.jagatgururampalji.org

'जीने की राह" तथा अमृतमय पुस्तक "ज्ञान गंगा" बिलकुल फ्री मे पाने के लिए कॉमेंट मे अपना नाम,एड्रैस तथा मोबाइल नंबर जरूर लिखे ताकि आसानी से पुस्तक आसानी से आपके पास पहुच सके।
www.jagatgururampalji.org

20 comments:

  1. आपकी बात बिल्कुल सही है जी... आज के इस युग में मानव खुद को पीछे छोडकर माया के पीछे भाग रहा है इंसान अपने आपने आप को भी समय नही दे पाता जिसकी वजह से उसके सारे रिश्ते नाते भी पीछे छुटे जा रहे हैं...

    ReplyDelete
  2. आपकी ये पोस्ट उन लोगो के लिए जागरूकता का काम करेगी जो अपने जीवन का उद्देश्य भूल चुके है...

    ReplyDelete
  3. जीवन की सच्चाई जानना भी जरूरी है कि हमारा इस मनुष्य जीवन के पीछे असल में उद्देश्य क्या था हम केवल चन्द छोटी खुशियों के लिए अपना पूरा जीवन बर्बाद कर देते हैं और वो काम फिर भी अधूरा रह जाता है जिसके लिए परमेश्वर ने हमे सबसे भिन्न मनुष्य जीवन दिया है पढ़े पुस्तक जीने की राह और अपना जीवन सुखमय और सही दिशा में चलाएं।

    ReplyDelete
  4. आजकल इस माया की दौड़ के अंदर हम अपने जीवन का मूल उद्देश्य भूल गया है हम यहां पर क्यों आए हैं क्या करना चाहिए और क्या करने से हमें सद्गति प्राप्त होती है हम परमात्मा को भूल गए और माया के अंदर पड़ गए हैं बंगले बना रहे हैं गाड़ी ले रहे हैं रोज दिन की भागदौड़ हैं एक घंटा भी हम परमात्मा के नाम पर नहीं निकाल पा रहे हैं अतः आओ पढ़े एक पुस्तक जीने की राह जिसे पढ़ने मात्र से ही सब बुराई का अंत होता है वह मन में मन को शांति मिलती हैं

    ReplyDelete
  5. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  6. आज इंसान अपना पूरा जीवन पैसा कमाने में लगा देता है वो अपना मूल उद्देष्य भी भूल रहा है

    ReplyDelete
  7. केवल धन जोड़ने से खुश नहीं हुआ जा सकता और यह धन भी यही छोड़कर कर जाना पड़ेगा।
    जाने कि वाकय में अपना मनुष्य जीवन का असली उद्देश्य क्या है।
    बहुत ही अनमोल विचार है पुस्तक जीने की राह में।

    ReplyDelete
  8. हां वाकई में इस पोस्ट में दी गई बात तो बिल्कुल १०१% सही हैं और आजकल के इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में हम अपना मूल उद्देश्य भूल चुके हैं

    ReplyDelete
  9. Ji bilkul sahi baat hai Aakhir kaar aunt May kya Sath aana hai...... Sara Jeevan Paisa kamane main Bangla Banane Mein Guzar Jata Hai Lekin Parmatma ki Bhakti nahi kar Pate hain aur aunt May Mrityu ko prapt ho jate.......

    ReplyDelete
  10. एक बार जरुर पडे

    ReplyDelete
  11. बहुत ही अच्छी पुस्तक है एसी पुस्तक पढ़कर मन को इतनी शांति मिलती है किसी से बेरभाव नहीं रहता सभी को ये पुस्तक अवश्य पढ़नी चाहिए

    ReplyDelete
  12. गजब बुक है ये मैंने भी पढ़ी है

    ReplyDelete
  13. जिने कि राह बहुत ही अनमोल पुस्तक हैं जो हमे सही और सुखी जिवन के साथ सत्य आध्यात्मिक राह भी दिखाती हैं।

    ReplyDelete
  14. जिने कि राह बहुत ही अनमोल पुस्तक हैं इसे पढने मात्र से ही व्यक्ति के जिवन मे सकरात्मक परिवर्तन शुरू हो जाते हैं।

    ReplyDelete
  15. जिने कि राह बहुत ही अनमोल पुस्तक हैं इसे पढने मात्र से ही व्यक्ति के जिवन मे सकरात्मक परिवर्तन शुरू हो जाते हैं।

    ReplyDelete
  16. बहुत ही अच्छी पुस्तक है जीने की राह जो की संत रामपालजी महाराज के द्वारा लिखी गई है। इस अद्भुत पुस्तक को अवश्य मंगवाए।

    ReplyDelete
  17. यह पुस्तक मनुष्य जीवन मे सुख से जीने के लिये बहुत ही अछि पुस्तक है, आप भी एक बार जीने की राह पुस्तक अवश्य पढ़े

    ReplyDelete
  18. बहुत ही जबरदस्त पुस्तक है मैंने भी पड़ी थी आप भी जरूर पढ़ना

    ReplyDelete