आज हम जीवन की भागदौड़ मे खुद को भूलते जा रहे है, ओर एक दिन ऐसा आएगा की इस माया की भागदौड़ मे खुद को खत्म कर देंगे ।
मनुष्य को अपना सुखी जीवन जीने के लिए सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। जीवन में 'रात व दिन' की तरह आशा व निराशा के क्षण आते जाते रहते हैं। आशा जहां जीवन में संजीवनी शक्ति का संचार करती है वहीं निराशा मनुष्य को पतन की तरफ ले जाती है। निराश मानव जीवन में उदासीन और विरक्त होने लगता है। उसे अपने चारों तरफ अंधकार नजर आता है। निराशा का संबंध एकतरफा सोच भी है। साथ ही मनुष्य के दृष्टिकोण पर भी आधारित है, मनुष्य जिस तरह की भावनाएं रखता है वैसी ही प्रेरणाएं मिलती हैं। जो लोग स्वयं के लाभ के लिए जीवन भर व्यस्त रहते हैं उन्हें जीवन में निराशा, अवसाद, असंतोष ही परिणाम में मिलता है।
जीवन के इसी व्यस्त रास्ते मे हमे कही से आशा की किरण दिख जाती हे ओर हमे एक "जीने की राह" मिल जाती है ।
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आपकी बात बिल्कुल सही है जी... आज के इस युग में मानव खुद को पीछे छोडकर माया के पीछे भाग रहा है इंसान अपने आपने आप को भी समय नही दे पाता जिसकी वजह से उसके सारे रिश्ते नाते भी पीछे छुटे जा रहे हैं...
ReplyDeleteआपकी ये पोस्ट उन लोगो के लिए जागरूकता का काम करेगी जो अपने जीवन का उद्देश्य भूल चुके है...
ReplyDeleteजीवन की सच्चाई जानना भी जरूरी है कि हमारा इस मनुष्य जीवन के पीछे असल में उद्देश्य क्या था हम केवल चन्द छोटी खुशियों के लिए अपना पूरा जीवन बर्बाद कर देते हैं और वो काम फिर भी अधूरा रह जाता है जिसके लिए परमेश्वर ने हमे सबसे भिन्न मनुष्य जीवन दिया है पढ़े पुस्तक जीने की राह और अपना जीवन सुखमय और सही दिशा में चलाएं।
ReplyDeleteआजकल इस माया की दौड़ के अंदर हम अपने जीवन का मूल उद्देश्य भूल गया है हम यहां पर क्यों आए हैं क्या करना चाहिए और क्या करने से हमें सद्गति प्राप्त होती है हम परमात्मा को भूल गए और माया के अंदर पड़ गए हैं बंगले बना रहे हैं गाड़ी ले रहे हैं रोज दिन की भागदौड़ हैं एक घंटा भी हम परमात्मा के नाम पर नहीं निकाल पा रहे हैं अतः आओ पढ़े एक पुस्तक जीने की राह जिसे पढ़ने मात्र से ही सब बुराई का अंत होता है वह मन में मन को शांति मिलती हैं
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ReplyDeleteआज इंसान अपना पूरा जीवन पैसा कमाने में लगा देता है वो अपना मूल उद्देष्य भी भूल रहा है
ReplyDeleteकेवल धन जोड़ने से खुश नहीं हुआ जा सकता और यह धन भी यही छोड़कर कर जाना पड़ेगा।
ReplyDeleteजाने कि वाकय में अपना मनुष्य जीवन का असली उद्देश्य क्या है।
बहुत ही अनमोल विचार है पुस्तक जीने की राह में।
हां वाकई में इस पोस्ट में दी गई बात तो बिल्कुल १०१% सही हैं और आजकल के इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में हम अपना मूल उद्देश्य भूल चुके हैं
ReplyDeleteJi bilkul sahi baat hai Aakhir kaar aunt May kya Sath aana hai...... Sara Jeevan Paisa kamane main Bangla Banane Mein Guzar Jata Hai Lekin Parmatma ki Bhakti nahi kar Pate hain aur aunt May Mrityu ko prapt ho jate.......
ReplyDeleteएक बार जरुर पडे
ReplyDeleteबहुत ही अच्छी पुस्तक है एसी पुस्तक पढ़कर मन को इतनी शांति मिलती है किसी से बेरभाव नहीं रहता सभी को ये पुस्तक अवश्य पढ़नी चाहिए
ReplyDeleteअनमोल पुस्तक
ReplyDeleteगजब बुक है ये मैंने भी पढ़ी है
ReplyDeleteजिने कि राह बहुत ही अनमोल पुस्तक हैं जो हमे सही और सुखी जिवन के साथ सत्य आध्यात्मिक राह भी दिखाती हैं।
ReplyDeleteजिने कि राह बहुत ही अनमोल पुस्तक हैं इसे पढने मात्र से ही व्यक्ति के जिवन मे सकरात्मक परिवर्तन शुरू हो जाते हैं।
ReplyDeleteजिने कि राह बहुत ही अनमोल पुस्तक हैं इसे पढने मात्र से ही व्यक्ति के जिवन मे सकरात्मक परिवर्तन शुरू हो जाते हैं।
ReplyDeleteबहुत ही अच्छी पुस्तक है जीने की राह जो की संत रामपालजी महाराज के द्वारा लिखी गई है। इस अद्भुत पुस्तक को अवश्य मंगवाए।
ReplyDeleteयह पुस्तक मनुष्य जीवन मे सुख से जीने के लिये बहुत ही अछि पुस्तक है, आप भी एक बार जीने की राह पुस्तक अवश्य पढ़े
ReplyDeleteबहुत ही जबरदस्त पुस्तक है मैंने भी पड़ी थी आप भी जरूर पढ़ना
ReplyDeleteKabir saheb is supreme God.
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